मस्त विचार 4768
बहुत दिनों से अकेले बैठा हूँ, खुद से पूछ रहा हूँ ” कैसा हूँ “
दूसरों की शिनाख्त में तो हर शख्स माहिर है..
अपने आप को अपने शरीर से परिभाषित मत करो .. यह अनंत है जो ब्रह्मांड में हर चीज से जुड़ा है.
ये_दुनिया दिखाती शहद है पिलाती ज़हर है.
जीवन में न तो लोग स्थिर हैं न ही यहां की स्थितियाँ…!!
सभी मुझसे अधिक भयावह अनुभव लिए बैठे हैं.