सुविचार 3270
चीज़ों की कीमत मिलने से पहले होती है और इंसानों की खोने के बाद.
चीज़ों की कीमत मिलने से पहले होती है और इंसानों की खोने के बाद.
लेकिन इसके बिना सब कुछ स्वादहीन हो जाता है.
मैं मानव हूं, मुझमें कमजोरियां हैं, मैं गलतियां करता हूं, और मैं उदासी का अनुभव करता हूं; लेकिन मैं इन सब चीजों से सीखता हूं और ये मुझे एक बेहतर इंसान बनाती हैं.
लोगों को दूसरों के दर्द का एहसास नहीं होता.
जो आपकी भावनाओं को ना समझता हो.
और छोटा सा – ना” _ पूरी ज़िंदगी बदल देता है.”
जरुरी है हर किरदार कुछ नया सिखाए.
हम इसी वास्ते हर शख्स से कम मिलते हैं.