सुविचार 3208
अभावात्मक सोच – अपने पास जो है या जो हमें मिला है,
उसे हमेशा कम आँक कर दुःखी होना अभावात्मक सोच है.
उसे हमेशा कम आँक कर दुःखी होना अभावात्मक सोच है.
शांत रहें और परवाह न करें कि दूसरे क्या सोचते हैं.
आपकी हिम्मत के सामने घुटने टेक देती हैं.
अगर रखना है कदम, तो आगे रख, पीछे खींचने के लिये लोग हैं.
_हम सभी इस दुनिया से बिना कुछ लिए चले जाते हैं.!!
औऱ गुणवान बनने के लिए एक-एक क्षण का सदुपयोग करना पडता है..!
किसी को पाकर खोकर भी देख लिया….
जिंदगी वही जी सकता है जिसने अकेले जीना सीख लिया…!!
वो एकदिन सबको बताएंगे कि वो आपसे कैसे मिले थे.
जिससे वो चारो तरफ अप्रिय बन जाता है ..