सुविचार 3247
और उठा लोगे तो एकदम हलकी हो जायेगी..
और उठा लोगे तो एकदम हलकी हो जायेगी..
समस्या तो होती है, लेकिन समाधान भी साथ होता है,”
वरना ज़ख्म इतने हैं की ठीक से रोया भी नहीं जाता.
बाद में तो वही मिलेगा _ जो बीज बोया था..
इन छोटी छोटी बातों से हार जाऊं वो इंसान नहीं हूं मैं.
अपने अतीत की परछाइयों को अपने भविष्य के द्वार पर अँधेरा न करने दें, क्षमा करें और जाने दें.
लोग खामोश होते हैं पर नासमझ नहीं…!!
लेकिन लोग ये नहीं जानते की टूटने के बाद ही वो व्यक्ति इतना मजबूत हो पाया है.
कुछ अँधेरा हम मिटायें, कुछ अँधेरा तुम मिटाओ.
सिलसिला यह प्यार का, प्रेम और सौहार्द का
हर घड़ी और हर बरस, यूँ ही हम मिलकर मनाएं.
एक दीया हम जलाएं, एक दीया तुम जलाओ..