सुविचार 3269
नमक की तरह अपना एक अनोखा किरदार रखो, क्योंकि इसकी उपस्थिति महसूस नहीं होती है ;
लेकिन इसके बिना सब कुछ स्वादहीन हो जाता है.
लेकिन इसके बिना सब कुछ स्वादहीन हो जाता है.
मैं मानव हूं, मुझमें कमजोरियां हैं, मैं गलतियां करता हूं, और मैं उदासी का अनुभव करता हूं; लेकिन मैं इन सब चीजों से सीखता हूं और ये मुझे एक बेहतर इंसान बनाती हैं.
लोगों को दूसरों के दर्द का एहसास नहीं होता.
जो आपकी भावनाओं को ना समझता हो.
और छोटा सा – ना” _ पूरी ज़िंदगी बदल देता है.”
जरुरी है हर किरदार कुछ नया सिखाए.
हम इसी वास्ते हर शख्स से कम मिलते हैं.
उसके आंसू आपके लिए सजा बन सकते हैं.