सुविचार 3158
व्यक्ति स्वयं ही स्वयं का मित्र है, स्वयं का शत्रु है, अपने मन से निराशा का भाव हटाकर अपने मन को खुद उठाए, शक्तिशाली बनना चाहते हैं तो मन को मित्र बनाऐं.
व्यक्ति स्वयं ही स्वयं का मित्र है, स्वयं का शत्रु है, अपने मन से निराशा का भाव हटाकर अपने मन को खुद उठाए, शक्तिशाली बनना चाहते हैं तो मन को मित्र बनाऐं.
_ क्या आपने कभी महसूस किया है कि हम कभी कभी बेफिजूल के दुखी रहते हैं ?
एक सकारात्मक दृष्टिकोण बहुत आभार लाता है ! सकारात्मक सोचें, सकारात्मक रहें, सकारात्मक बोलें और सकारात्मक रहें _ इसे हर दिन करें और बड़ा करें.
और संबंधों में दरार आने लगती है.
लेकिन लोग वैसे भी नही होते जैसे नजर आते है.
सब से ज्यादा खुद का ही दिल दुखाया है दूसरों को खुश करने में.
कभी तो छोड़ दीजिये कश्तियों को लहरों के सहारे..