सुविचार 4866
” कुछ दर्द “…दर्द नहीं होते, सबक होते हैं.
वो उतना ही बेपरवाह होकर मिलेगा.
मगर आत्मविश्वासी व सकारात्मक लोग ही डूबती नाव को बचा पाते हैं.
ख़्वाब बुनूँ या ख़्वाहिशें रफ़ू करूँ..
अब ना जाने कितने टुकड़ों में बट गया हूं मैं !
उनका अनुभव करो_ क्योंकि वे आपको ऊंचा उठाने आए हैं…
_ पर उसको ठीक से पूरा करना धैर्य और परिश्रम का.!!
जितना कम prove करोगे…उतना ज्यादा समझ जाओगे.!!
लेकिन लालच और अहंकार हमें भटका देते हैं.