मस्त विचार 4745
और कोई न साथ देने को तैयार और न हाथ थामने को..
और कोई न साथ देने को तैयार और न हाथ थामने को..
तो यह उससे कहीं अच्छा है की कोई दूसरा उसे सुधारे !!
तुमको अपने आप ही … सहारा मिल जाएगा
कश्ती कोई डूबती … पहुँचा दो किनारे पे
तुमको अपने आप ही किनारा मिल जाएगा..
तबाह करने का हौसला भी रखता हूं..
यदि यह जीवन है, तो इस पल की सार्थकता जीवन की सार्थकता है.
एक एक कर्म, एक फिल्म…. की तरह अपनी निगाहों ….के सामने झलकेगा …..
कोशिश करें कि ….अपनी फिल्म सबके देखने लायक हो …
मैंने कहा – यही तो खराबी है…
दयालुता आपको दुनिया का सबसे खूबसूरत इंसान बनाती है, चाहे आप कुछ भी दिखें..