मस्त विचार 2913
मुक्कमल कहाँ हुई, जिन्दगी किसी की…
आदमी कुछ खोता ही रहा, कुछ पाने के लिए..
आदमी कुछ खोता ही रहा, कुछ पाने के लिए..
_ काँटों के साथ तालमेल बना कर रखने की कला तो सीखनी ही होगी !
_ लोगों की मोहब्बत में पत्ता-पत्ता बिखर गया…
मैं क्या करूँ मुझे सच बोलने की आदत है.
बहुत बड़ा अभिशाप जगत में, अंधकार का जीवन जीना.
परिस्थितियों को बदलने का प्रयास करते हैं.
जीवन एक कैमरे की तरह है _ केवल उस पर ध्यान केंद्रित करें जो महत्वपूर्ण है _ और आप इसे पूरी तरह से पकड़ लेंगे.
लेकिन अगर हम बदलेंगे तो दुनिया भी बदल जाएगी.
अगर स्वयं का करने लगे तो अपना जीवन संवार लेगा.