सुविचार 3057
व्यक्तिगत रूपान्तरण की किसी भी प्रक्रिया में आत्म- स्वीकृति
एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण मनोभाव होता है.
एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण मनोभाव होता है.
मुठी से गिरा देते, पाँव से उड़ा देते…
_ सिर्फ सच्चाई ही बनी रहेगी.
कभी – कभी आप एक पल का सही मूल्य तब तक नहीं जान पाते जब तक कि वह एक स्मृति न बन जाए.
इतना खुद को तराशा होता, तो फरिश्ते हो जाते.
*बल्कि* *महत्वपूर्ण यह है कि,* *”सोच” किस उम्र की रखते हो..!!!*
_ क्योंकि इसमें आप लोगों को छोटा और लोग आपको छोटा देखेंगे.
_ ज़िंदगी भी बस इतना ही मांगती है..!!