मस्त विचार 2979
सीखा दिया वक़्त ने मुझे अपनों पे भी शक करना,
वरना फितरत थी गैरों पर भी भरोसा करने की.
वरना फितरत थी गैरों पर भी भरोसा करने की.
बासी सोच से समय बासने लग जाता है,”
ज़मीर ज़िंदा हो तो आप अकेले भी पर्याप्त हैं.
_ स्वयं पर विजय पाकर आनंद मिलता है.
मगर उसमें गांठ पड़ ही जाती है.
इंसान बहुत कुछ कर सकता है.
जो आपके पास है उसके लिए आभारी रहें ; आप अंत में और अधिक प्राप्त करेंगे _
_यदि आप उस पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आपके पास नहीं है, तो आपके पास कभी भी पर्याप्त नहीं होगा.
लगता है कहीं गहराई में दिल लगा बैठे हो…
ताकि आपके जीवन में कभी भी कोई भी अंधकार न फैला सके.