सुविचार 3009
क्योंकि कई लछ्य एकसाथ बना लेने से हम कन्फ्यूज हो जाएंगे और कुछ भी प्राप्त नहीं होगा.
क्योंकि कई लछ्य एकसाथ बना लेने से हम कन्फ्यूज हो जाएंगे और कुछ भी प्राप्त नहीं होगा.
हकीकत से मैंने भी दोस्ती कर ली !!!
यह दुखों को निमंत्रण है; हकीकत में आना ही सुखों का आगमन है.
लोभ और क्रोध क्षणिक भी आये तो ठीक नहीं, किन्तु यदि ये आ जाये तो इन्हें शीघ्र विदा कर दें, यदि ये ज्यादा देर तक ठहरे और अहंकार से जुड़ गए तो फिर इनको विदा करना लगभग असंभव हो जाता है ! क्योंकि अहंकार कई बातों की आड़ ले लेता है और इन दोनों से तो क्या सबसे ज्यादा खतरनाक होता है ! अतः ध्यान रखे काम क्रोध लोभ मोह वैसे तो क्षणिक भी ठीक नहीं किन्तु अहंकार के साथ ये स्थायी हो जाते हैं !!!
कर – कर के थक जाए …!! और जाते जाते जिंदगी भी मुस्कुरा कर बोले …!!!
आप से मिल कर खुशी हुई …!
कमब्खत खुशबू ने कोहराम मचा दिया.
_ या फिर जिम्मेदारी उठाओ उन्हें बदलने की..
जो इतना गुमान कर गया.
बिना गलती के भी माफ़ी मांगनी पड़ती है.
इस तरह चांदनी में जला हूँ कि अब अंगार हूँ मैं…