मस्त विचार 2929
इतना खुद को तराशा होता, तो फरिश्ते हो जाते.
इतना खुद को तराशा होता, तो फरिश्ते हो जाते.
*बल्कि* *महत्वपूर्ण यह है कि,* *”सोच” किस उम्र की रखते हो..!!!*
_ क्योंकि इसमें आप लोगों को छोटा और लोग आपको छोटा देखेंगे.
_ ज़िंदगी भी बस इतना ही मांगती है..!!
_ धूप कितनी भी तेज़ हो समंदर नहीं सूखा करते.
_ अक्सर वे पौधे मुरझा जाते हैं, जिनकी परवरिश छाया में होती है..!
“रहम” जो इंसानियत की बुनियाद पर आज भी खड़ा है.
और हौंसला तो देखिये शर्त हवाओं से लगा रखी है…
प्रेम उस गुण का होना चाहिए जो स्वतंत्रता देता है, न कि आपके लिए नई जंजीरें; एक प्यार जो आपको पंख देता है और जितना संभव हो उतना ऊंचा उड़ने में आपकी सहायता करता है. ~ OSHO
“जो मैं देख रहा हूं वह यह है: लोग सोचते रहते हैं कि वे खुश रहना चाहते हैं, लेकिन वे क्या कर सकते हैं ? – उन्हें दुखी होने के लिए मजबूर किया जा रहा है ; यह बिल्कुल बेतुका है.
कोई किसी को मजबूर नहीं कर रहा — कोई किसी को मजबूर नहीं कर सकता — दुखी होने के लिए ;
एक आदमी जो खुश रहना जानता है _ वह किसी भी तरह की स्थिति में खुश रहता है ;
आप उसे ऐसी कोई स्थिति नहीं दे सकते _ जिसमें उसे खुश होने के लिए कुछ न मिले.
और ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने दुखी होने की तरकीब सीख ली है ; आप उन्हें ऐसी कोई स्थिति नहीं दे सकते _ जिसमें उन्हें दुखी होने की कोई बात न मिले.
तुम जो भी खोजना चाहते हो, तुम पाओगे ; जीवन आपको हर तरह की चीजों की आपूर्ति करता चला जाता है ; ” इसे आप चुनते हैं !” ~ Osho