सुविचार 3005
कभी कभी ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है कि
बिना गलती के भी माफ़ी मांगनी पड़ती है.
बिना गलती के भी माफ़ी मांगनी पड़ती है.
इस तरह चांदनी में जला हूँ कि अब अंगार हूँ मैं…
आप तभी जीत सकते हैं जब आपका दिमाग आपकी भावनाओं से ज्यादा मजबूत हो.
संगीत भी मैं तेरा हूँ तेरे लिये हीे बजाता हूँ,
खूबियाँ हैं तेरी मुझमें तुझी पे लुटाता हूँ.
दोनो ही नकली हो गये आंसू और मुस्कान.
पूरी दुनिया को “डुबोने” की “ताकत” रखने वाला “समंदर”
“तेल” की एक बूंद को नहीं “डूबो” सकता.
उसके पास पंख नहीं है “
यही जीवन का श्रेष्ठ अभिनय है.
मुझे लोगों की तरह बदल जाना नहीं आता……!