सुविचार 2958
जबकि अच्छा स्वभाव उसे आजीवन निभा सकता है.
जबकि अच्छा स्वभाव उसे आजीवन निभा सकता है.
_ मुद्दा ये है कि परवाह किसको है ..
जब तक हम दूसरों के दुख-सुख में हाथ नहीं बंटाएंगे तब तक जीवन की सार्थकता साबित नहीं होगी.
जब हम दया, सेवा और कर्तव्य-पारायणता से भरे होते हैं तो अपने आप में आनंद अनुभव करते हैं.
सभी के बीच अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जीना ही जीवन है.
ये जुदा बात है कि दर्द में भी आराम रहा.
बहुत मज़ेदार हो जाती है,”
आपके जीवन की कहानी में कई अध्याय हैं। एक बुरे अध्याय का मतलब यह नहीं है कि यह किताब का अंत है.
तथा दुखी के लिए प्रकृति का सर्वोत्तम उपहार है.
समय के साथ वह आशीर्वाद सिद्ध होती है…
_ दरअसल वो हमारी हिफाज़त होती है..