मस्त विचार 2837
लफ्ज़ों के इत्तेफाक में बदलाव कर के देख,
_ तू देख कर न मुस्कुरा बस मुस्कुरा के देख.!!
उड़ते फिरते हैं तितलियों की तरह, लफ्ज़ कागज़ों पर बैठते ही नहीं..!!
_ तू देख कर न मुस्कुरा बस मुस्कुरा के देख.!!
और अपने भाग्य का निर्माण स्वयं करने का अवसर पा जाते हैं.
_ मुझे कौन सा इस दुनिया में फिर आना है..
जिससे अधिक फल प्राप्त होता है.
*तकलीफ तो तब हुई जब* *एक ही इंसानो के पास चेहरे बहुत हैं*
आपका जीवन दुनिया के लिए आपका संदेश है, सुनिश्चित करें कि यह प्रेरणादायक है.
सोचो, आपके कार्य महान है या अधम ?
जो अक्सर कहते थे बहुत अच्छे से जानते हैं “तुझे”….
वैसे ही बुराइयों से भरे मनुष्य में उस की थोड़ी सी अच्छाई उस के सारे अवगुणों को ढक देती है.