सुविचार 4573
यह संसार अद्भुत होने के साथ ही नैतिकता सीखने की पाठशाला भी है.
की उसे पता चल चुका है की वे मुर्ख हैं.
जिक्र तेरा जरूर होता है…!
एक स्वतंत्र विचारक बनें और जो कुछ भी आप सुनते हैं उसे सत्य के रूप में स्वीकार न करें,_ आलोचनात्मक बनें और मूल्यांकन करें कि आप किस पर विश्वास करते हैं…
क्यूंकि पूरी दुनिया में कारपेट बिछाने से खुद के पैरों में चप्पल पहन लेना अधिक सरल है.
ये नियति का नियम है.
हर कोई अपनी तकदीर और अपनी हक़ीकत बनाने में लगा है.
और पहचान रहे हो, तो ठहर क्यूँ नहीं जाते ??