सुविचार 4844
बहोत कुछ है जिसे बदलना अति अति अति आवश्यक है,
धीमी गति से ही सही मगर खुशी की बात है काम जारी है.
धीमी गति से ही सही मगर खुशी की बात है काम जारी है.
कमबख्त अगर हम ही इसे जीना ना सीख पाएं तो
इसमें जिंदगी की क्या गलती.
लगता है अब बस पढना ही पढना है..
बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया..
जब हम अंदर बाहर दोनों तरह से मजबूत हों हर बात के प्रति जागरूक हों.
” जीवन के सभी अंधकार मिटा देती है “…
” बैठना और नोटिस करना आसान है, जो मुश्किल है वह है उठना और कार्रवाई करना “
ख़ुद की बताने का मन नहीं करता…