मस्त विचार 2804
जो साज से निकली है…….वो धुन सबने सुनी है,
जो तार पे गुजरी है…….वो दर्द किसको पता है !
जो तार पे गुजरी है…….वो दर्द किसको पता है !
आपने उस घटना को कैसे संभाला ये आपका अनुभव है.
किसी बेहतर से मेरी बनती नहीं..!!
तो दुःखों का समाधान हो सकता है.
_ और फिर उँगली छुड़ा कर भीड़ में गुम हो गई !
और समझ आ गई तो, अकेले में मेला..!!!
लेकिन बेइज्जती भूल जाना नामुमकिन है.
तब आपको कोई भी नहीं रुला सकता.
हमारी खामोशियों का भी अपना रुतबा है….
तुमसे भी बहुत मजबूर इंसान है इस जहां में !!