सुविचार 2751
झांकना खुद की झोली में है कि कहीं कोई ‘सुराख’ तो नहीं*
झांकना खुद की झोली में है कि कहीं कोई ‘सुराख’ तो नहीं*
पैसा एक अच्छा नौकर बनाता है, लेकिन एक बुरा मालिक.
जो आपसे वह करवा लेती है, जिसे करना सबके वश में नहीं होता.
सही हो तो गुमराह नहीं होने देते…!
यहां मंजर खामोशियों का है तो फ़िर क्या किया जाये.
*यह है* *कि* *वो उन लोगों की भी इज्जत करता है*,
*जिनसे उसे किसी किस्म के* *फायदे की उम्मीद नही होती*..!!
मगर कुछ खामोशियों के ज़ख्म तो और भी गहरे निकले !
वरना, इंसानियत से बड़ा रिश्ता कौन सा है.
_ अब, पैसा ही सब कुछ है.. _कितना बदल गया इंसान ?
बस जरा चुप हो जाएं तो सुनाई देगा.
पर ये भूल जाते हैं कि बीज खुद उन्होंने ही बोया है…