मस्त विचार 2802
_ और फिर उँगली छुड़ा कर भीड़ में गुम हो गई !
और समझ आ गई तो, अकेले में मेला..!!!
_ और फिर उँगली छुड़ा कर भीड़ में गुम हो गई !
और समझ आ गई तो, अकेले में मेला..!!!
लेकिन बेइज्जती भूल जाना नामुमकिन है.
तब आपको कोई भी नहीं रुला सकता.
हमारी खामोशियों का भी अपना रुतबा है….
तुमसे भी बहुत मजबूर इंसान है इस जहां में !!
They Only Search For Someone To Agree With Them..!!
अधिकांश लोग सत्य की तलाश नहीं करते, उनसे सहमत होने के लिए ही वो ढूंढते हैं..!!
अब तो, गाड़ी, कपड़े और जूते लोगों की औकात तय करते हैं.
_ दुश्मनी की दीवार खड़ी कर लेते हैं.
_तो बाहर भी अभिव्यक्ति अपने आप बदल जाएगी.
_लेकिन उसका गला नहीं घोंट पाएंगे.