सुविचार 2820
जो वक़्त पर पसीना नहीं बहाते,
वो बाद में आंसू बहाते हैं.
वो बाद में आंसू बहाते हैं.
कुछ तालाब खुद को समंदर समझ बैठे हैं.
परिस्थितियां वैसी ही दिखती हैं जैसे हमारे मन की स्थिति होती है.
मंजिल तमाम उम्र मुझे ढूंढ़ती रही.
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ.
अपनी आवाज मत उठाओ, अपने तर्क में सुधार करो.
आज का ये दिन इक उम्र बन के गुज़रा है..!!
जो समय आने पर आपको पूरे ब्याज सहित वापस मिलता है.
कुछ हक़…..दिए नहीं जाते…..लिए जाते हैं..