मस्त विचार 2794
मंजिल का नाराज होना भी जायज था,
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे.
हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे.
मैंने चुप रहके बाज़ी पलट दी.
वह इंसान बहुत से लोगों को अप्रिय लगने लगता है.
लोग अक्सर दूसरों का सामान खो देते हैं.
दुनिया में खुश रहने के बहाने बहुत हैं,,,
आपमें क्या झलकता है, यह उससे तय होती है.
बिना अल्फ़ाज़ों के कहती हैं बड़ी गहरी बातें।
हैं बादल भी मेरे हमराज़ सुनते हैं वो भी मेरी बातें,
चुपके से वो कहीं दूर फिर बरसा जातें हैं राज़ की बातें।
और सबको मेरी जरुरत है यह भ्र्म है.
जब अपनों से उम्मीद कम हो गयी.
” बीज ” को ” दफन ” होना पड़ता है.