मस्त विचार 2698
हमारे बगैर भी आबाद थीं महफिलें उनकी;
और हम समझते थे कि उनकी रौनकें हम से है !
और हम समझते थे कि उनकी रौनकें हम से है !
उसके लिए एक अच्छे मन की जरुरत होती है.
उसे भी किसी नज़र का इंतज़ार होता है…
की हम कर सकते हैं.
वो बाद में आंसू बहाते हैं.
कुछ तालाब खुद को समंदर समझ बैठे हैं.
परिस्थितियां वैसी ही दिखती हैं जैसे हमारे मन की स्थिति होती है.
मंजिल तमाम उम्र मुझे ढूंढ़ती रही.
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ.