सुविचार 2720
सच्चाई अपने आप में इतनी बढ़ाओ
कि आपको हराने के लिए लोगों को कोशिशें नहीं…..साजिशें करनी पड़ें…
कि आपको हराने के लिए लोगों को कोशिशें नहीं…..साजिशें करनी पड़ें…
एक खुदा की इबादत ही थी जो, हर बार टलती गयी…
तूने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली.
और एक सच ये भी है.. इसे और कहीं ढूँढना संभव नहीं.
तो हमारा इंसान होना व्यर्थ है..
हम कैसे हैं, ये कभी भूल कर भी नहीं सोचा….
लेकिन उन समस्याओं से, मिलने वाली सीख को मत भूलिए.
क्योंकि सफलता का आकलन सदैव दूसरों के द्वारा होता है
जबकि संतुष्टि स्वयं के मन और मस्तिष्क द्वारा…
आप खुद अपनी नज़र के पिंजरे में कैद हो.
क्यूंकि उन्हें हर समाधान में भी समस्या नज़र आती है.