मस्त विचार 2580
जिंदगी तेरे भी नखरे गजब हैं,
एक दिन “हँसा” कर महीनों “रुलाती” है !
एक दिन “हँसा” कर महीनों “रुलाती” है !
निराशा से तो बेहतर ही होती है….
प्रेम ही एक ऐसी शक्ति है जो शत्रु को मित्र बना सकती है.
जहां से चले थे फिर वहीँ आ गए हम..
आप इत्र खरीदें, ना खरीदें
पर खुशबू का आनंद तो आपको मिलता ही है.
कोई मेरा रास्ता रोकने की कोशिश कर सकता है…
लेकिन मेरी मंजिल और काबिलियत नहीं….
बल्कि हमें और अधिक प्रेम मिलता है.
और शाम होते-होते, मेरा आज भी चला गया.
अहंकार सदा माफ़ी सुनना पसंद करता है..!
जिंदगी का आखिरी कपड़ा कफन, उसमें भी जेब नहीं.
फिर जिंदगीभर जेब को भरने की खटपट क्यों.