मस्त विचार 2560
मिली तो इस “शर्त” पे कि किसी से ना मिलो..!!
मिली तो इस “शर्त” पे कि किसी से ना मिलो..!!
सकारात्मक कार्रवाई करने के लिए हमें यहां एक सकारात्मक दृष्टि विकसित करनी होगी.
अदब से कही गई, हर बात का वजन होता है.
“ज़िन्दगी एक सफ़र है, आराम से चलते रहो
उतार-चढ़ाव तो आते रहेंगें, बस गियर बदलते रहो”
गुमराह तो वो है जो घर से निकले ही नहीं.
फिर एक बार हर इंसान मुस्कराएगा,
मायूस न होना यारों,
ये बुरा वक्त भी कुछ ना कुछ जीने का नया तरीका सीखा कर जायेगा.
पर…उनको मेरी जरुरत होती तब…
बरसों से पड़े गुमसुम घरों को आबाद कर गया.
हम कभी नहीं समझे, सो अब कुदरत समझा रही है.
किसी भी काम को पूरी लगन के साथ करो.