सुविचार 4796

व्यक्तियों का चयन हमारे जीवन को प्रभावित करे या न करे, लेकिन एक सही व्यक्ति की उपेक्षा हमें जीवन भर पश्चाताप करने के लिए मजबूर कर देती है.

मस्त विचार 4670

लोग कमियां निकालते रहे मुझमे और मैं खामोशी से सफलता के रास्ते पर चलता रहा,

_ आज वही लोग मुझसे अपनी कमियों को दूर करने के तरीके पूछने आते हैं.

आप भले ही अच्छाई की मिसाल हो, पर दुनिया की नज़र अक्सर आपकी कमियों पर टिकती है.
लोग कहते हैं कि अपनी अच्छाइयों से लोगों को हराओ या उनके मन को जीतो,

_ लेकिन कहने वाले ये बताना भूल जाते हैं कि अच्छाई रोज आपको हराएगी..
_ और हम जिस चमकदार सामाजिक माहौल में रह रहे हैं..
_ वहां आपकी अच्छाइयां कमजोरियां ही साबित होती हैं.!!

सुविचार 4795

खुद पे थोड़ा घमंड होना जरुरी है, वरना लोग तुम्हें वहां भी दबाने की कोशिश करेंगे, जहां हुकूमत तुम्हारी होगी..

सुविचार 4794

हर किसी का अपना नजरिया होता है, अगर किसी का नजरिया आपसे अलग है तो इसका ये मतलब न निकालें, की वो गलत है.!

मस्त विचार 4669

इतना कुछ था दुनिया में लड़ने झगड़ने को, पर ऐसा मन मिला कि ज़रा से प्यार में डूबा रहा और जीवन बीत गया.

सुविचार 4793

वैसे तो खुशी को परिभाषित करना बहुत ही मुश्किल है लेकिन हमारी खुशी हमारी सोच पर निर्भर करती है. हम शिकायत कर सकते हैं कि गुलाब की झाड़ियों में कांटे होते हैं या खुश हो कर कह सकते है कि कांटों की झाड़ियों में गुलाब होते हैं. हमें हमेशा सुखद और कर वंदनीय लगने वाली सोच के साथ चलते रहना चाहिए.
हम हमेशा एक दूसरे से शिकवे शिकायत करते हैं, ये सोचकर कि सामने वाले को हम अपना मानते हैं और सामने वाला समझता भी है,

_ फिर धीरे धीरे वो शिकवे शिकायत होने कम होते चले जाते हैं और वो एक दूसरे के दूर भी होने शुरू हो जाते,
_ इस बात का एहसास तब नहीं होता, उस वक्त जरूर होता है जब हम किसी को खो चुके होते हैं
_ फिर उस वक्त एहसास होता है कि वो शिकायतें तो सही थी, बस हम ही खुद को न बदल पाए और न सामने वाले को समझ पाए।
_ जब इंसान व्यस्त होता है तो बहुत सी चीजों को इग्नोर करता है तो बहुत सी चीजों से दूर भागता है,
_ लेकिन जब वो अकेला होता है बिल्कुल समुद्र के शांत जल की तरह तो उसके अंदर एक उथल पुथल आ जरूर होता है ज्वालामुखी की तरह, जो उसके अंदर उबल रहा होता है।
_ बस अफसोस उस वक्त हालात ऐसे हो जाते हैं कि सुनने वाला ही कोई नहीं होता…
_ बस यही जिंदगी है, हर किसी को एक दूसरे से शिकायतें हैं, कोई कहने वाला है तो कोई चुपचाप सुनने वाला।
_ बस एक दूसरे को समझने वाले कम हो गए हैं….
— हेसाम

सुविचार 4792

खराब शक्ल की अहमियत सफ़लता के बाद है… उसके पहले इसे तुच्छ समझा जाता है..!!!
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