सुविचार 2707
जिंदगी पर इस बात का आरोप नहीं लगाया जा सकता कि
इसने हमें वो नहीं दिया, जिसकी हमें इससे उम्मीद थी.
इसने हमें वो नहीं दिया, जिसकी हमें इससे उम्मीद थी.
और दूसरों के साथ अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए.
दूर से देखने पर हम ज़रा मग़रूर दिखते हैं.
एक दिन “हँसा” कर महीनों “रुलाती” है !
निराशा से तो बेहतर ही होती है….
प्रेम ही एक ऐसी शक्ति है जो शत्रु को मित्र बना सकती है.
जहां से चले थे फिर वहीँ आ गए हम..
आप इत्र खरीदें, ना खरीदें
पर खुशबू का आनंद तो आपको मिलता ही है.
कोई मेरा रास्ता रोकने की कोशिश कर सकता है…
लेकिन मेरी मंजिल और काबिलियत नहीं….
बल्कि हमें और अधिक प्रेम मिलता है.