सुविचार 2682
जितने में गुजारा कर रहे हैं, असल में जरुरत बस इतने की ही थी,
हम कभी नहीं समझे, सो अब कुदरत समझा रही है.
हम कभी नहीं समझे, सो अब कुदरत समझा रही है.
किसी भी काम को पूरी लगन के साथ करो.
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साये हैं.
वास्तविकता वह है, जिस पर विश्वास करना बंद करने पर, दूर नहीं होता है.
आप का आज कैसा होना चाहिए, उसमें आप क्या करें, क्या न करें – यह सब पूरी तरह आपके उपर निर्भर है.
अब तू ही बता अब इस से ज़्यादा और कैसे चाहूँ तुझे..
जिस दिन पत्थर बना, लोगों ने देवता मान लिया.
तो इंसान मतलबी न होता.
टूट अगर हम गए तो बिखर तुम भी जाओगे.