मस्त विचार 2285
हमने साँसों की वसीयत तुम्हारे नाम कर दी…
हमने साँसों की वसीयत तुम्हारे नाम कर दी…
क्षमता आपको शीर्ष पर पहुंचा सकती है, लेकिन आपको वहां बनाए रखने के लिए चरित्र की आवश्यकता होती है.
और; बिंदी 1 रूपये में आती है; मगर माथे पर सजाई जाती है;
इसलिए कीमत मायने नहीं रखती; उसका कृत्य मायने रखता है.
ये ना करते तो फिर प्यार हो जाता.
सर्दियो में जिस सूरज का इंतजार होता है,
उसी सूरज का गर्मियों में तिरस्कार भी होता है.
आप की कीमत तब होगी जब आपकी जरुरत होगी.
बाद में जाने क्या हुआ, न जाने क्या बात हुई.
तुम मोम बन जाओ, मैं धागा बन जाऊं.
तुम मुझ में पिघल जाओ, मैं तुम में जल जाऊं.
तो हमारी सम्भावनाएँ अपरिमित हो जाती हैं.
तो उन्हें गलत मत समझिये,
क्योंकि आप उनकी जिन्दगी की वो रोशनी की किरण हैं
जो उन्हें सिर्फ, अन्धेरों में ही दिखाई देती है.