मस्त विचार 2148
मंजिलें तो खुशनसीबों को नसीब हो गई, हम तो दीवाने हैं सफर में ही रहेंगे.
खुशनसीब होते हैं वे लोग.. जो जागी आंखों से अपने ख्वाब पूरे करते हैं.!!
अपने अंदर के एक- एक दोष को व कमजोरी को बाहर फेंकना शुरू कर देंगे.
कहां तक साथ चलोगे ये बताओ मुझको.
“नशा चाहे…..रूप, शराब, पद, कद, पैसा या अन्य का हो “
लेकिन उस के पहले हमें आसमान छू कर देखना है,
…..जिंदगी भी यही चाहती है.
समस्या को सहेजने और लोगों को बताने से उसका समाधान नहीं होता, बल्कि वह और भी गंभीर हो जाती है.
लोगों को भी पता चले आखिर जिन्दगी होती क्या है…