सुविचार 2425
शायद यही कारण है कि इसमें इतने कम लोग लगे होते हैं.
शायद यही कारण है कि इसमें इतने कम लोग लगे होते हैं.
तो उसका आपसे बात करने का तरीका भी बदल जाता है.
जब हम अपनी महत्वक्षानुसार कर्म ( सफल होने के लिए परिश्रम ) नहीं करते तो बर्बाद होना तो निश्चित है !
अपनी चादर देखकर जो पाँव फैलाते रहे.
जब जवाब देते हैं तो बुरा बनाते हैं.
मगर अच्छे रिश्ते और अच्छे दोस्त कभी नही बदलते.
ये वक़्त- वक़्त की बात है और वक़्त तो सबका आता है.
कि सामने वाला खुद ही अपनी नजरों में गिर जाये.
तुम ने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना…
तो पहले आपको सूर्य की तरह जलना भी होगा…
दोस्तॊं से दोस्ती तो हर कोई निभाता है..
दुश्मनों को भी अपना दोस्त बनाना चाहता हूं, मैं..