सुविचार 2337
जब तक खुद पर ना गुजरे.
जब तक खुद पर ना गुजरे.
जब तक आप के पास ऐसा कुछ है…
जो पैसे से खरीदा ना जा सके….
जबकि इंसान छोटा होकर भी अपनी हद भूल जाता है..
संसार एक रंगमंच है इसमें हर व्यक्ति का अपना अलग रोल है, भूमिका है, _यदि ये बात हम समझ लेते हैं तो हमारे रिश्तों में सहजता और सहनशक्ति बढ़ जाती है !!!
दर्द होता है, पर आवाज नहीं आती.
अजीब लोग हैं इस जमाने में.
कोई भूल नहीं पाता और किसी को याद नहीं आती.
स्मृति को एक महान सत्य देना सराहनीय है; जीवन के प्रति समर्पण ही ज्ञान है.
ना किसी से मिलने की खुशी, ना किसी से बिछङने का डर….!!!
जो आपने कभी की ही नहीं.
आप से तुम तक, तुम से जान तक,
फिर जान से अनजान तक हो जाते हैं.
आपके अपनों को आपके खिलाफ भड़काने लग जाते हैं.