सुविचार 4597
न तो पूर्ण स्वतंत्र इच्छा होती है न ही पूर्ण भाग्य होता है,
_ जीवन इन दो सख्त नज़रियों के बीच कहीं जिया जाता है.
मेहनत- श्रम करें, कौशल-योग्यता हासिल करें और फिर कुछ भाग्य पर छोड़ दें.!!
_ जीवन इन दो सख्त नज़रियों के बीच कहीं जिया जाता है.
बिछड़ने का …कोई रिवाज़ ना हो…
जो पढ़ने के बाद आपको समझ सके.
जिंदगी को अपनों से जोड़ लो, है चार दिन की ये सोच लो..
उन्हें नहीं जो चेहरे पर शिकन पैदा करे.
*चादर बड़ी करें या,* *ख़्वाहिशे दफ़न करें !*
” मैं खुद को और कितना बदल सकता हूँ ताकि मेरा काम अधिक प्रभावी हो जाए ? “
पहले मुड़ कर देखते थे..,अब देख कर मुड़ जाते हैं ।
जीवन कड़वा है, लेकिन आपके पास इसे कड़वा रहने या इसे मीठा करने की शक्ति है.