मस्त विचार 1994

लोगों ने कुछ दिया तो सुनाया भी बहुत कुछ,

ऐ खुदा…एक तेरा ही दर है, जहां कभी ताना नहीं मिला.

Collection of Thought 594

As one grows older, one becomes wiser and more foolish.

जैसे-जैसे व्यक्ति बड़ा होता जाता है, एक समझदार और अधिक मूर्ख बन जाता है.

मस्त विचार 1993

जिंदगी मुझे सताती क्यों है, नमूने सा आजमाती क्यों है .

मुफलिसी का दुःख दर्द जो, हमसे ही तू निभाती क्यों है.

माना हो रहा बदन में दर्द , फिर सोने दे जगाती क्यों है.

मिला है खुदा ए रहमो करम, ना मारना तो सुलाती क्यों है.

जोकर सा अभिनय करा के, हंसाकर फिर रुलाती क्यों है.

जाएगा मुफलिसी का समय, तू आज कहंकहाती क्यों है.

होगा खत्म तेल दीपक का, बुझा मुझे जगमगाती क्यों है.

जख्म देना है फितरत तेरी, देख दर्द तू मुस्कुराती क्यों है.

है ललक कुमार में जीने का, मुझे मरना सिखाती क्यों है.

सुविचार 2118

असल में कोई भी व्यक्ति जब अपनी मंजिल तक पहुंचना चाहता है तो उस के रास्ते में बहुत कठिनाइयां आती हैं और उन से उसे खुद ही निकलना पड़ता है.

Quotes by जॉन म्यूर

जब कोई व्यक्ति प्रकृति में किसी एक भी चीज के प्रति खिंचाव महसूस करता है, तब उसे पता चलता है कि वह चीज़ सारी दुनिया के साथ जुड़ी हुई है.

सुविचार 2117

“गरीबी इस बात का प्रमाण है कि आपका दिमाग बीमार है.”

गरीब माइंड सेट – “मैं कुछ नहीं कर सकता”
अमीर माइंड सेट – “मैं कुछ भी कर सकता हूं, कुछ करने के लिए मैं क्या-क्या संघर्ष कर सकता हूँ ?”
गरीब इनकार करता है कि अवसर मौजूद है,; _ अमीर देखता है कि उपलब्ध समय, संपत्ति और तरल धन से अवसर कैसे सृजित किए जाएं.

मस्त विचार 1991

अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो…

मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो…

मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना….!

मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो.

सुविचार 2116

स्वयं को कभी कमज़ोर साबित ना होने दें,

क्यूंकि डूबते देखकर लोग घर के दरवाजे बंद करने लगते हैं.

मस्त विचार 1990

अहम् से ऊँचा कोई आसमान नहीं.

किसी की बुराई करने जैसा आसान कोई काम नहीं.

“स्वयं” को पहचानने से अधिक कोई “ज्ञान” नहीं.

और “क्षमा” करने से बड़ा कोई “दान” नहीं.

लोग कहते है कि आदमी को अमीर होना चाहिए..

और हम कहते है कि आदमी का जमीर होना चाहिए..॥

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