सुविचार 1979
देखा जाए तो परोक्ष रूप से मनुष्य के तमाम दुखों और तकलीफों का आधार यह सोच रही है कि मेरे दुख का कारण सामने वाला है. हम परिस्थितियों या किस्मत के साथ भी यही रवैया रखते हैं कि वह बदलें हम नहीं.
देखा जाए तो परोक्ष रूप से मनुष्य के तमाम दुखों और तकलीफों का आधार यह सोच रही है कि मेरे दुख का कारण सामने वाला है. हम परिस्थितियों या किस्मत के साथ भी यही रवैया रखते हैं कि वह बदलें हम नहीं.
गम चाहे कैसा भी हो मै आकर भूल जाता हूँ.
इश्क़ एक इबादत है, कारोबार नहीं….
सब ने सोच लिया मुझे तकलीफ़ नहीं होती.
नज़र उठाओ सामने ज़िंदगी खड़ी है.
एक ‘; मुस्कुराहट ‘; और दूसरी ‘; दुआ ‘;,
हमेंशा बांटते रहिए !! हमेंशा बढ़ती रहेंगी !!
नदियों को बहने के लिए किसी, पथ की जरूरत नहीं होती.
जो बढ़ते हैं जमाने में, अपने मजबूत इरादों के बल,
उन्हें अपनी मंजिल पाने के लिए, किसी रथ की जरूरत नहीं होती.
बल्कि इतना ही बोलो की लोग आप के बोलने का इन्तजार करें.