सुविचार 4740
जिसकी बराबरी नहीं की जा सकती, उसकी बदनामी शुरू कर दी जाती है..!!
जिन्दगी तुझे लफ्ज़ो में और कैसे बयां करू…
सौ शिकारी हैं, एक परिंदा हूं “
यही बीज आगे वृक्ष बनकर हमारे संचित कर्मों में जुड़ जाएंगे जिनका फल हमें भोगना ही होगा।
अपने लक्ष्यों के प्रति आक्रामक रहें, अपने लायक से कम कुछ भी स्वीकार न करें.