मस्त विचार 1787
दुनिया देखते ही देखते…बेगैरत हो गई,
हम जरा से क्या बदले…सबको हैरत हो गई.
हम जरा से क्या बदले…सबको हैरत हो गई.
जिन्हें हमारी फ़िक्र होती है.
“लोगों को तर्क से कभी मत जीतो, बल्कि अपनी चुप्पी से उन्हें हराओ… क्योंकि जो लोग
हमेशा आपसे बहस करना चाहते हैं, वे आपकी चुप्पी बर्दाश्त नहीं कर सकते…”चुप रहो, समझदार बनो.
_यदि वे सवाल नहीं कर सकते, तो वे कुछ भी नहीं बदल सकते.!!
जितना भी सोचते हैं, उतना ही महक जाते हैं….