सुविचार 1942
जिस समय दूसरे लोग समय ख़राब कर रहे होते हैं.
जिस समय दूसरे लोग समय ख़राब कर रहे होते हैं.
जमीं अक्सर किनारों से ही खिसका करती है.
जिसमें पैर नहीं दिल थक जाते हैं.
इसलिए, दूर निकलना छोड़ दिया है,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब…मैंने चलना ही छोड़ दिया है.
फासलें अक्सर रिश्तों में…अजीब सी दूरियां बढ़ा देते हैं,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब मैंने…अपनों से मिलना ही छोड़ दिया है.
हाँ जरा सा अकेला महसूस करता हूँ …खुद को अपनों की ही भीड़ में,
पर ऐसा भी नहीं है कि अब मैंने….अपनापन ही छोड़ दिया है.
याद तो करता हूँ मैं सभी को…और परवाह भी करता हूँ सब की,
पर कितनी करता हूँ…बस बताना छोड़ दिया है.
थोड़ा थक सा जाता हूँ अब मैं…
इसलिए, दूर निकलना छोड़ दिया है,
*यदि आप किसी बात से सहमत नहीं है तो .. *चर्चा करिये*.
*यदि आप को कुछ पसंद नहीं है .. तो *बताइये*.
*लेकिन चुप रह कर किसी *निर्णय तक मत पहुँचिये*.
एक सफल जीवन वह है जिसकी मृत्यु के समय मन में कोई इच्छा नहीं बची हो.
*ज्यादा “होशियार” तो हमेशा* *’उलझा’ हुआ रहता है…!*
कंजूस को दान देना बुरा लगता है, लोभी को मांगने वाला बुरा लगता है, चोरों को प्रकाश बुरा लगता है, मुर्ख को समझाने वाला उपदेशक बुरा लगता है, कर्जदार को तगादा बुरा लगता है ,रूपवान को बुढ़ापा अच्छा नहीं लगता, निर्धन को धनवान अच्छा नहीं लगता, जिसका मन- शोक चिंता से ग्रसित और व्याकुल हो उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता, अतः शोक और चिंता से बचे !!!