मस्त विचार 1782
ज़रा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है,
समंदरों के लहजे में बात करता है.
समंदरों के लहजे में बात करता है.
स्वयं को एक “शांत सरोवर” की तरह बनाएं…..
जिसमें कोई “अंगारा” भी फेंके तो..खुद बख़ुद ठंडा हो जाए…..!!!!
वो मुझे याद नहीं करता, मैं उसको भूल नहीं पाता.
बड़ा अच्छा लगता हैं…!!!
दूसरों को अपनी बात सुनाने के लिए अपनी आवाज तेज न करें… लेकिन
अपनी पर्सनैलिटी को इतना बुलंद करें कि दूसरे आपकी बात सुनने का इंतजार करें…
वरना जमाने में तो हर कोई मज़बूरी का फायदा उठाता है.
…हम *सही* हो सकते हैं…लेकिन मात्र हमारे सही होने से , *सामने वाला गलत* नही हो सकता…!!!