मस्त विचार 1794
कोशिश कर रहा हूँ की कोई मुझसे न रूठे !
जिन्दगी में अपनों का साथ न छूटे !
रिश्ते कोई भी हो उसे ऐसे निभाउ !
कि उस रिश्ते की डोर ज़िन्दगी भर न छूटे.
जिन्दगी में अपनों का साथ न छूटे !
रिश्ते कोई भी हो उसे ऐसे निभाउ !
कि उस रिश्ते की डोर ज़िन्दगी भर न छूटे.
पुरुष उन बातों से परेशान नहीं होते जो घटित हुई हैं, _ लेकिन जो कुछ होता है उसके बारे में उनकी राय से..
“अनचाहा ” सुनने की ताकत होनी चाहिए.
“मैं” मिलने में सुख है.
वर्ना तमन्ना तुमसे मिलने की कभी पूरी न होती.
जिम्मेदारियां निभाते हुए, जवाबदारियाँ संभालते हुए, मन को सदा स्वतंत्र और अप्रभावित रखना – यह भी एक कला है, साधना है !!!