मस्त विचार 1785
सिर्फ दिखावे के लिए अच्छा बनना, शायद बुरा होने से भी बुरा है.
“लोगों को तर्क से कभी मत जीतो, बल्कि अपनी चुप्पी से उन्हें हराओ… क्योंकि जो लोग
हमेशा आपसे बहस करना चाहते हैं, वे आपकी चुप्पी बर्दाश्त नहीं कर सकते…”चुप रहो, समझदार बनो.
_यदि वे सवाल नहीं कर सकते, तो वे कुछ भी नहीं बदल सकते.!!
जितना भी सोचते हैं, उतना ही महक जाते हैं….
समंदरों के लहजे में बात करता है.
स्वयं को एक “शांत सरोवर” की तरह बनाएं…..
जिसमें कोई “अंगारा” भी फेंके तो..खुद बख़ुद ठंडा हो जाए…..!!!!
वो मुझे याद नहीं करता, मैं उसको भूल नहीं पाता.