सुविचार 1906
हम सब कुछ नहीं बदल सकते, और कभी-कभी हम बस इतना ही कर सकते हैं कि _उसे रहने दें !
हम सब कुछ नहीं बदल सकते, और कभी-कभी हम बस इतना ही कर सकते हैं कि _उसे रहने दें !
बड़ा अच्छा लगता हैं…!!!
दूसरों को अपनी बात सुनाने के लिए अपनी आवाज तेज न करें… लेकिन
अपनी पर्सनैलिटी को इतना बुलंद करें कि दूसरे आपकी बात सुनने का इंतजार करें…
वरना जमाने में तो हर कोई मज़बूरी का फायदा उठाता है.
…हम *सही* हो सकते हैं…लेकिन मात्र हमारे सही होने से , *सामने वाला गलत* नही हो सकता…!!!
जो रूला सकता है वो भुला भी सकता है !!
क्यूँकि बिना “समर्पण” के संकल्प नहीं हो सकता और न ही बिना “संकल्प” के समर्पण …
वही लोग जिन्दगी को सच्ची तरीके से जीते हैं…