मस्त विचार 1681
कुछ अपने लिए लिखता हूँ कुछ रब के लिये लिखता हूँ,
जो नही कर सकते अपना दर्द-ए-दिल बयां,
मैं उन सब के लिए लिखता हूँ.
जो नही कर सकते अपना दर्द-ए-दिल बयां,
मैं उन सब के लिए लिखता हूँ.
_ खुला हो दरवाज़ा, फिर भी खटखटाना पड़े ..
आपको डराने वाली कोई एक चीज़ रोज़ाना करें.
मेरी मंज़िल तो आसमान है रास्ता मुझे खुद बनाना है !!!
हमें तेज हवाओं में नौका चलाने की आदत डालनी चाहिए.