मस्त विचार 1646
पूरी ना हुई तो बड़ी लगने लगी..
पूरी ना हुई तो बड़ी लगने लगी..
जो खुद को संभालना तथा अपनी बिगड़ी को बनाना जानता है.
आँसुओ से खुद को सींचता हूँ मैं
तुम खड़े हो साथ, बस इस आस में जी रहा हूँ मैं
दबे पाँव बे गैरत, जिंदगी झुका रही
आहिस्ता आहिस्ता, मोहवश जी रहा
राह उसकी तक रहा मैं..
जीवन इस बारे में नहीं है कि आप कितनी सांसें लेते हैं बल्कि उन पलों के बारे में है जो आपकी सांस को रोक लेते हैं.
रोना तो हो गया मगर मिलना नहीं हुआ.
ना घटने का डर, ना लुटने का डर, ना जरूरत वारीस की, ना तालों की.
नींद आती है सकुन की हर रोज ..यही है सच्ची दौलत बिन दौलत वालों की.