सुविचार 1870
किसी भी तरह की ग़लतफ़हमी दिल में न पालें, इसके आधार पर कोई भी सम्बन्ध न तोड़ें, जब भी किसी बात पर शंका हो, बातचीत के जरिये उसे सुलझाने का प्रयास करें, याद रखें ज्यादात्तर गलतफहमी हमारे शंकालु दिमाग या परिस्थितियों की उपज होती है !!!
किसी भी तरह की ग़लतफ़हमी दिल में न पालें, इसके आधार पर कोई भी सम्बन्ध न तोड़ें, जब भी किसी बात पर शंका हो, बातचीत के जरिये उसे सुलझाने का प्रयास करें, याद रखें ज्यादात्तर गलतफहमी हमारे शंकालु दिमाग या परिस्थितियों की उपज होती है !!!
“दुआ” मिले बड़ो से.. “साथ” मिले अपनों से..
“खुशियां” मिले जग से.. “रहमत” मिले रब से..
“प्यार” मिले सब से.. “यही “दुआ” है रब से..
सब खुश रहे आप से और आप खुश रहे सबसे.!!
“दुनियां के रेन बसेरे में..पता नही कितने दिन रहना है”
“जीत लो सबके दिलो को..बस यही जीवन का गहना है”..!!
मेरे चहरे पर कोई जंची ही नहीं.
जब हकीकत यही है, तो इंसान को गरूर किस बात का है.
ज़िन्दगी में हर एक तूफान नुकसान करने नहीं आता,
कुछ तूफान रास्ता साफ करने भी आते हैं.
“पानी” अपना पूरा जीवन दे कर पेड़ को बड़ा करता है,
इसलिए शायद पानी लकड़ी को कभी डूबने नहीं देता.
तकलीफ़ लोगो को तब हुई जब मैं जी गया ….