सुविचार 4691
आपकी “अच्छाइयां”…बेशक अदृश्य हो सकती हैं..
लेकिन इनकी छाप…हमेशा दूसरों के हृदय में विराजमान रहती है..
लेकिन इनकी छाप…हमेशा दूसरों के हृदय में विराजमान रहती है..
क्योंकि वो मुझे उतना ही समझेंगे जितनी उनमे समझ है..!!
जब ये बात हम सभी जानते हैं__ तो फिर मानते क्यों नहीं ..?
_ चेहरे परख लेने की बुरी आदत है मुझे..!!
अब हम लोगों से नहीं खुद से इश्क़ करते हैं.
अपनी महानता और भाग्य पर संदेह करना बंद करो..
दबे- दबे जीने का क्या मजा ??
_ उसी प्रकार वर्तमान में किए गए हर छोटे प्रयास भविष्य में बड़े परिवर्तन की ओर ले जाते हैं.!!