सुविचार 1802
आशावादी हर आपत्तियों में भी अवसर देखता है और निराशावादी बहाने !!!
जिन्दगी फिर से लिखने का मन होता है कभी- कभी.
वक़्त उनसे मनवा लेता है.
कुछ लोग तो यही सोच कर परेशान रहते हैं,
ये सामने वाला इतना खुश क्यों है.
सकारात्मक सोच के साथ आपका सकारात्मक कार्य सफलता की ओर ले जाता है.
वरना समय तय कर लेगा की आपका क्या करना है.
कि दो कौड़ी के लोग खेल कर चले जाएं.
जैसे मिट्टी के गुल्लक में लोहे के सिक्के.