सुविचार 4505
यह सोच सबमें विकसित हो कि जिनकी चेतना उच्च है,
वे निम्न चेतनावालों को प्रेम दें, उनकी मदद करें, उन्हें करुणा का पात्र समझें.
वे निम्न चेतनावालों को प्रेम दें, उनकी मदद करें, उन्हें करुणा का पात्र समझें.
सबको सुनते रहोगे तो पीछे रह जाओगे..
चाहे कोई खुश रहे चाहे जाये रूठ..
उस चीज पर नहीं, जो तुमने खोया है !
_ बल्कि आज का सुकून भी चला जाता है.
इसे खुला छोड़ दो, यह अपना बचाव खुद कर लेगा !!
जब आपको अपने आस-पास के लोगों के लिए खुद से और अपनी नैतिकता से समझौता करना शुरू करना पड़े, तो शायद यह समय आपके आसपास के लोगों को बदलने का है.