मस्त विचार – “मेरे मन की बात” – 1479

“मेरे मन की बात”

🤔 मेरी मृत्यु होगी तो आप मेरे रिश्तेदारो से मिलने आएंगे और मुझे पता भी नही चलेगा, तो अभी आओ ना मुझ से मिलने.

😔 मेरी मृत्यु होगी तो आप मेरे सारे गुनाह माफ कर दोगे जिसका मुझे पता भी नही चलेगा, तो आज ही माफ कर दो ना.

😔  मेरी मृत्यु होगी तो आप मेरी कद्र करोगे मेरे बारे में अच्छी बातें कहोगे जिसे मैं नहीं सुन सकूँगा, तो अभी बोलो ना.

😉 मेरी मृत्यु होगी तो आपको लगेगा कि इस इंसान के साथ और वक़्त बिताया होता तो अच्छा होता, तो आज ही आ जाओ बैठो मेरे साथ.

😌इसीलिए इंतजार मत करो इंतजार करने में कभी कभी बहुत देर हो जाती है.

😌मुझमे बहुत सी कमी है पर मरने के बाद मुझे कोई नही बताएगा, इसलिए मुझमे जो कमी है मेरे जिंदा रहते मुझे बताओ की मैं उसे दूर कर सकूँ.

😌आज समय गूँगा नही बस मौन है.

मस्त विचार 1478

न जाने क्यूँ…, होता है ये ज़िंदगी के साथ..,

अचानक ये मन किसी के जाने के बाद..,

करे फिर उसकी याद छोटी छोटी सी बात..!!!

सुविचार 1589

एक सफल व्यक्ति वो है जो दूसरे द्वारा अपने ऊपर फेंके गए पत्थर पर एक मजबूत घर बना लेता है.

सुविचार 1588

सफलता का महत्व वह व्यक्ति अच्छे से जानता है, जिसने सफलता पाने से पहले झकझोर देने वाली असफलता का सामना किया हो.

Collection of Thought 488

Four things come not back; The spoken word, The sped arrow, The past life, The neglected opportunity.

चार चीजें वापस नहीं आतीं; बोले गए शब्द, तेज तीर, पिछला जीवन, उपेक्षित अवसर.

मस्त विचार – कुछ हँस के बोल दिया करो – 1477

कुछ हँस के बोल दिया करो, कुछ हँस के टाल दिया करो,

यूँ तो बहुत परेशानियां है, तुमको भी मुझको भी,

मगर कुछ फैसले वक्त पे डाल दिया करो,

न जाने कल कोई हंसाने वाला मिले न मिले..

इसलिये आज ही हसरत निकाल लिया करो !!

हमेशा समझौता करना सीखिए..

क्योंकि थोड़ा सा झुक जाना,

किसी रिश्ते को हमेशा के लिए तोड़ देने से बहुत बेहतर है ।।।

किसी के साथ हँसते-हँसते उतने ही हक से रूठना भी आना चाहिए !

अपनो की आँख का पानी धीरे से पोंछना आना चाहिए !

रिश्तेदारी और दोस्ती में कैसा मान अपमान ?

बस अपनों के दिल मे रहना आना चाहिए…

सुविचार 1587

यहाँ कोई भी अपना जीवन अपने स्वभाव में, अपने ढंग से नहीं जीता है. सभी दूसरों को खुश करने में अपना जीवन बरबाद कर रहे हैं. सभी अपनी सारी जीवन ऊर्जा को दूसरों को प्रभावित करने में नष्ट कर रहे हैं. कोई कभी भी किसी दूसरे को खुश नहीं कर सकता है. जब कोई स्वयं से ही खुश नहीं है तो, वह दूसरों को खुश कैसे कर सकता है, जबकि स्वयं को स्वयं के द्वारा ही खुश किया जा सकता है.

सुविचार 1586

वक़्त के पास हर चोट का ईलाज है. जीवन की चोटों पर वक़्त मरहम है. ये चोटें हीं हमारे इरादों को और मजबूत करती हैं.

सुविचार 1585

सोच ये ना रखें की मुझे रास्ता अच्छा मिले, बल्कि ये होना चाहिए कि मैं जहां पांव रखूं वो रास्ता अच्छा हो जाए.
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