सुविचार 1668
दूसरों के सहायक बनने से आप अपनी चिंताओं को अवश्य भूल जाएंगे.
दूसरों के सहायक बनने से आप अपनी चिंताओं को अवश्य भूल जाएंगे.
खुद की कीमत का जिन्हें अंदाजा नहीं होता.
तो ख़ुशी और हल्कापन जीवन में दिखाई देता है.
इसे बनाने के लिए “मेहनत” का हुनर चाहिए.
अब फ़ोन वायर से आज़ाद है और आदमी बंधा है.
सफलता और शांति पाने के लिये बेहतर है कि स्वयं को बदलें.
धार वक़्त की बड़ी प्रबल है, इसमें लय से बहा करो,
जीवन कितना क्षणभंगुर है, मिलते जुलते रहा करो.
यादों की भरपूर पोटली, क्षणभर में न बिखर जाए,
दोस्तों की अनकही कहानी, तुम भी थोड़ी कहा करो.
हँसते चेहरों के पीछे भी, दर्द भरा हो सकता है,
यही सोच मन में रखकर के, हाथ दोस्त का गहा करो.
सबके अपने-अपने दुःख हैं, अपनी-अपनी पीड़ा है,
यारों के संग थोड़े से दुःख, मिलजुल कर के सहा करो.
किसका साथ कहाँ तक होगा, कौन भला कह सकता है,
मिलने के कुछ नए बहाने, रचते-बुनते रहा करो.
मिलने जुलने से कुछ यादें, फिर ताज़ा हो उठती हैं,
इसीलिए यारों नाहक भी, मिलते जुलते रहा करो.