मस्त विचार 1399
मंझधार नाव करके, करता न कोई पार है.
मंझधार नाव करके, करता न कोई पार है.
उनके नाम का “गुलाल” हवा में उड़ाया मैंने..
दूर से भी कुछ इस तरह.. अपने “रिश्ते” को निभाया मैंने..
ईर्ष्या प्रतिशोध की भावना को जन्म देती है, _ जो समय आत्म-सुधार के लिए उपयोग किया जा सकता था, वह दूसरों के बीमार होने की योजना बनाने में बर्बाद हो जाता है.
खिलना महकना ही जीवन की ऊँचाई है.
Unhappy people focus on what’s missing..
खुश लोग इस बात पर ध्यान केंद्रित करते हैं कि उनके पास क्या है…
नाखुश लोग इस बात पर ध्यान केंद्रित करते हैं कि क्या गुम है..
जब होता है दर्द, तो जमाना याद आता है,
हर इक लम्हे का, फ़साना याद आता है,
दिन गुजरते हैं हवाओं की तरह,
गुजर गया जो, सफर सुहाना याद आता है।
जिसे चोट पहुंचाई, जाने अनजाने,
उसका अफसोस, मलाल आता है।
हर दोस्त कमीना, याद आता है।
हर रुसवाई, रूठना, मनाना याद आता है।
कस कर पकड़ लें, हर पल को,
रह जाए ना कोई आस बाकी,
अपनों के प्यार में पागल,वो,
दीवाना याद आता है।
जीवन की जरूरतों में मशगूल, मज़बूर हो गए,
बिन पंखों के भी,वो उड़ना याद आता है ,
माँ का आँचल,पिता का साया याद आता है ।
माथे पे गुलाल का टीका लगा देना,
चुटकी में लेकर गुलाल उंडेल कर होली मनाना,
मुझे तो वो छुटपन का पानी में रंग घोल कर,
डूबना डुबाना याद आता है।
।।पीके ।।