सुविचार 4517
समानुभूति यानी किसी और की भावनाओं को स्वाभाविक रूप से समझना, कि वह क्या महसूस कर रहा है, उन्होंने आपमें क्या भाव जगाए हैँ.
जो खुद भी अब पहले जैसे नहीं रहे…
जब आपका अपने विचारों पर नियंत्रण होता है, तो आपका अपने जीवन पर नियंत्रण होता है.
मीठा भी हो सकता है ज़हर कोई……..!!
लोग तो पीछे तब आते हैं जब हम कामयाब होने लगते हैं.
_ बल्कि इतना मजबूत बनो कि आपको तोड़ने वाला खुद ही टूट जाए.
_ मजबूत होने का असली अर्थ हैँ जो बुरा लगे वो कहना आ जाए.!!
*मौन से अच्छा कोई “साधन” नहीं, और शब्द से तीख़ा कोई “बाण” नहीं*_