Collection of Thought 258
प्रेरणा मस्तिष्क के लिए भोजन की तरह है, _ आप एक बैठक में पर्याप्त नहीं हो सकते, इसे लगातार और नियमित टॉप अप की जरूरत है.
प्रेरणा मस्तिष्क के लिए भोजन की तरह है, _ आप एक बैठक में पर्याप्त नहीं हो सकते, इसे लगातार और नियमित टॉप अप की जरूरत है.
लेकिन किस्मत और नसीब नही..!
“श्रेय मिले न मिले,
अपना श्रेष्ठ देना कभी बंद न करें.
अगर हमारे पास थोड़ा ज्ञान है, तो हम अपने ज्ञान को दूसरों तक फैलाने के लिए तैयार हैं, सिर्फ इसलिए कि अपने स्वयं के बनाए अहंकार को बढ़ावा देने के लिए… बेहतर है कि चुप रहें…
राह में राही रुक न जाना होकर तू मजबूर.
एक दौड़ता हुआ दिमाग कुछ भी नहीं सीख सकता और सब कुछ याद नहीं कर सकता.
यदि आपने इससे सीखा तो आपका अतीत कभी गलती नहीं था.