मस्त विचार 1204
मेरी छाया में राहत पाता है कोई और
तपता ही रह जाता हूँ मैं.
मेरी छाया में राहत पाता है कोई और
तपता ही रह जाता हूँ मैं.
तेरी संगत में खुद को झुकाना सीख गए.
पहले मायुस हो जाते थे कुछ ना मिलने पर
अब तेरी रजा में राजी रहना सीख गए.
यदि आप समस्या की जड़ को खोज लेते हैं तो एक बार और सभी के लिए इससे निपटना बहुत आसान हो जाता है.
“वक़्त” ही कितना लगता है “वक़्त” बदलने में…
शेर अपने शिकार पर अंतिम छलांग लगाने से पहले एक कदम पीछे हट जाता है, _ उसी तरह, जब आप जीवन में वापस सेट हों, तो अपनी बड़ी छलांग के लिए तैयार रहें.
जिन मसलों का हल नहीं, उसे समय पर छोड़.
क्रोध से आपको कुछ हासिल नहीं होगा, _ तो इस तरह की चीज़ों में अपना समय क्यों बर्बाद करें ?